कुछ अधिकारी अपने कर्मों और निष्ठा से जनता के दिलों में अमिट छाप छोड़ जाते हैं। ऐसे ही एक अधिकारी हैं सोलन जिले की कृष्णगढ़ उप तहसील के नायब तहसीलदार सूरत सिंह। जहां आम लोग सरकारी कार्यालयों में छोटे-छोटे कामों के लिए चक्कर लगाते हैं, वहीं सूरत सिंह अपनी सरल, पारदर्शी और संवेदनशील कार्यशैली से जनता के सच्चे सेवक बन चुके हैं।

कृष्णगढ़ उप तहसील के साथ-साथ परवाणु का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे सूरत सिंह, करीब डेढ़ दर्जन पंचायतों के हजारों ग्रामीणों के लिए एक मसीहा की तरह हैं। वे न केवल हर किसी की बात ध्यान से सुनते हैं बल्कि अपने मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक रूप से साझा करते हैं ताकि कोई भी नागरिक बिना परेशानी के अपनी बात उन तक पहुँचा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति तहसील कार्यालय आता है, तो सूरत सिंह जी की हमेशा यही कोशिश रहती है कि उसे दोबारा चक्कर न लगाना पड़े। उन्होंने जनसेवा को महज़ एक सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि धर्म समझा है।

स्थानीय पंचायत प्रधानों  कैलाश शर्मा (कृष्णगढ़), रमेश ठाकुर (दडावा), सतीश कुमार (बढलग), बलवंत ठाकुर (चंडी), प्रेम सिंह (ढकरियाणा), आशा ठाकुर (जगजीत नगर), हेमा देवी (बुघारकानेता) सुदर्शन जैसे दर्जनों गणमान्य लोग उनके कार्यों की सराहना करते हैं।

सबसे सराहनीय बात यह है कि जनता का काम न रुके, इसके लिए उन्होंने डाटा ऑपरेटर की सैलरी अपनी जेब से देना शुरू किया है। यह एक असाधारण पहल है, जो किसी भी सरकारी अधिकारी के लिए मिसाल है।

अब जबकि नायब तहसीलदार सूरत सिंह जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं, पंचायत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से उनका सेवा काल बढ़ाने की अपील की है।

उनकी कार्यशैली, समर्पण और संवेदनशीलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर अधिकारी चाहे तो सरकारी सेवा भी समाज की असली सेवा बन सकती है। ऐसे अधिकारी की कार्यशैली आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

 

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