हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने में वर्षों से जुटे कलाकारों को सातवीं हिमाचल उत्सव की सांस्कृतिक संध्या में विशेष सम्मान दिया गया। यह अवसर सोलन के जगदंबा रामलीला मंडल के लिए गर्व का पल था, क्योंकि पिछले 45 वर्षों से लगातार रामलीला के मंचन द्वारा परंपराओं को आगे बढ़ा रहे इस मंडल को मंच पर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि अर्की के विधायक संजय अवस्थी ने मंडल के पदाधिकारियों और वरिष्ठ कलाकारों को सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ही समाज को संस्कृति से जोड़ते हैं। उन्होंने मंडल के निदेशक हरीश मरवाह, प्रधान धर्मेंद्र ठाकुर, सह निदेशक कुलदीप रावत, महासचिव सुमित खन्ना, वरिष्ठ संयोजक मुकेश गुप्ता, प्रदीप तंवर, सचिन वर्मा और मनीष मरवाह को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

सांस्कृतिक परंपरा की पहचान

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जगदंबा रामलीला मंडल ने अपने समर्पण और निरंतर साधना से सोलन की रामलीला को एक अलग पहचान दी है। उनकी प्रस्तुतियां केवल धार्मिक न होकर सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन गई हैं। हर वर्ष हजारों लोग इन प्रस्तुतियों को देखने आते हैं और रामायण के संदेशों को आत्मसात करते हैं।

युवा मंडल की सराहना

इस अवसर पर युवा मंडल ने भी जगदंबा रामलीला मंडल की प्रशंसा की। युवा मंडल के संस्थापक अध्यक्ष पंकज सूद, संस्थापक उपाध्यक्ष मुकेश शर्मा और संस्थापक महासचिव कीर्ति कौशल ने कहा कि ऐसी संस्थाएं ही आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने मंडल के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके योगदान से आने वाले समय में भी सोलन की रामलीला की पहचान और मजबूत होगी।

समाज के लिए प्रेरणा

रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और सकारात्मक संदेश देने का एक सशक्त माध्यम है। जगदंबा रामलीला मंडल ने पिछले चार दशकों में अपने कार्य से यह साबित किया है कि जब समर्पण और सेवा भाव जुड़ जाते हैं तो परंपराएं नई ऊंचाइयों को छूती हैं।

भविष्य की ओर कदम

सम्मान समारोह ने यह संदेश भी दिया कि सांस्कृतिक धरोहरों को संजोना केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक गौरव की बात है। हिमाचल उत्सव जैसे मंच इन प्रयासों को और व्यापक पहचान दिलाने का कार्य कर रहे हैं।

कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि आने वाली पीढ़ियों तक इस सांस्कृतिक विरासत को पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे

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