दिवाली सिर्फ एक दिन का नहीं बल्कि पूरे छह दिनों तक चलने वाला भव्य त्योहार है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज के साथ होता है। धनतेरस के बाद नरक चतुर्दशी, फिर दीपावली, गोवर्धन पूजा और अंत में भाई दूज का पर्व मनाया जाता है।

गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण और गिरिराज पर्वत की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन गोबर से गिरिराज महाराज का स्वरूप बनाकर उनकी आराधना की जाती है और उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। अन्नकूट को भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है।

अन्नकूट का अर्थ होता है—विभिन्न अनाज, सब्जियों और दालों का मिश्रण। इसमें कई तरह की सब्जियां और अनाज मिलाकर बनाया जाता है। इसे प्रसाद के रूप में भगवान को अर्पित किया जाता है और बाद में परिवार व भक्तजन इसका प्रसाद ग्रहण करते हैं।

अन्नकूट बनाने के लिए सबसे पहले घर में उपलब्ध सभी सब्जियों जैसे—आलू, प्याज, टमाटर, गाजर, गोभी, शिमला मिर्च, बैंगन, भिंडी, कद्दू, लौकी, फलियां आदि को बारीक काट लें।

फिर एक पैन में तेल गरम करें और उसमें जीरा, हींग, अदरक-लहसुन का पेस्ट और तेज पत्ता डालें। इसके बाद सारी सब्जियां डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब इसमें थोड़ा चावल और मूंग दाल डालें और थोड़ा पानी डालकर कुकर में 2-3 सीटी तक पकाएं।

अब मसाला तैयार करें — धनिया पाउडर, लाल मिर्च, काला नमक, आमचूर, गरम मसाला और हल्दी को मिलाकर घोल बना लें। जब सब्जियां पक जाएं तो कुकर खोलें और ये मसाला डाल दें। मीडियम फ्लेम पर इसे कुछ देर पकने दें ताकि सभी फ्लेवर अच्छे से मिक्स हो जाएं।

अंत में तैयार अन्नकूट की सुगंध पूरे घर में फैल जाती है। इसे भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।अन्नकूट का स्वाद बेहद खास होता है क्योंकि इसमें हर सब्जी और मसाले का अपना अलग स्वाद होता है। इसे रोटी, पूरी या चावल के साथ खाया जा सकता है। यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और एकता का प्रतीक है।

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