रविवार को वृश्चिक संक्रांति का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे वृश्चिक संक्रांति कहा जाता है। यह दिन धर्म और आस्था का संगम माना जाता है, खासतौर पर क्योंकि इस वर्ष संक्रांति रविवार के दिन पड़ी है, जो सूर्य देव का ही वार है।

इस शुभ मौके पर स्नान और दान का विशेष महत्व है। सुबह सूर्योदय के समय नदी, सरोवर या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर उनकी पूजा की जाती है। अर्घ्य के लिए तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, चावल और हल्दी मिलाकर सूर्य को अर्पित करें।

सूर्य मंत्र का जाप करें
अर्घ्य के बाद ‘ॐ सूर्याय नमः’ या ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करने से मनोवांछित फल मिलता है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य मंत्र का जाप करने से सुख, सौभाग्य और आरोग्य में वृद्धि होती है। यह मंत्र न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि सेहत को भी सुदृढ़ करता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गरीबों को दान देना अत्यंत फलदायी माना जाता है। लाल वस्त्र, गुड़, तांबे के बर्तन और लाल वस्तुएं दान में देना शुभ माना गया है।

वृश्चिक संक्रांति का यह शुभ समय सूर्य देव की कृपा पाने और जीवन में उजाला भरने का उत्तम अवसर है। तो यदि आप भी सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना रखते हैं, तो आज ही सूर्य देव से प्रार्थना करें और इस पवित्र दिन का पूरा लाभ उठाएं।

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