अगर आपके घर में जल्द ही शहनाई बजने वाली है, तो परंपरा के मुताबिक शादी की तैयारियों की शुरुआत कुछ खास निमंत्रणों से जरूर करें। उज्जैन के प्रसिद्ध वास्तु और ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, विवाह के निमंत्रण पत्र छपने के बाद उन्हें सबसे पहले कुछ विशेष देवताओं और पूज्य रूपों को अर्पित करना चाहिए ताकि विवाह निर्विघ्न संपन्न हो।

आचार्य के अनुसार, पहला निमंत्रण भगवान गणेश को दिया जाता है, जिन्हें विघ्नहर्ता और मंगल कार्यों के आरंभकर्ता के रूप में पूजा जाता है। निमंत्रण पत्र को गणेश जी की प्रतिमा या चित्र के सामने अर्पित करना शुभ माना जाता है।

दूसरा निमंत्रण भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को दिया जाता है, क्योंकि विवाह जैसे मांगलिक आयोजन में इन दोनों की कृपा को आवश्यक माना गया है। तीसरा निमंत्रण हनुमान जी के नाम होता है ताकि किसी भी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव आयोजन पर न पड़े।

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शादी के चौथे निमंत्रण में परिवार के कुलदेवी या कुलदेवता का स्मरण किया जाता है। इससे पारिवारिक आशीर्वाद और संरक्षण प्राप्त होता है। अंत में, पांचवां निमंत्रण पितरों को समर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार, पितरों को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ के नीचे निमंत्रण पत्र रखकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

आचार्य भारद्वाज कहते हैं कि इन परंपराओं का उद्देश्य सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पारिवारिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखना भी है। इन विशेष निमंत्रणों से शुभ ऊर्जा का प्रवाह होता है और विवाह जैसे पवित्र बंधन की शुरुआत सकारात्मकता से होती है।

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