कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी रास्ता नहीं रोक सकते। इस कहावत को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की बेटी मेघा सिंह कंवर ने। राजगढ़ उपमंडल की पझौता घाटी के सनौरा गांव से ताल्लुक रखने वाली मेघा ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2025 (HPAS) में टॉप कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
साधारण परिवार, असाधारण उपलब्धि
मेघा सिंह कंवर एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता नरेंद्र सिंह कंवर गांव में एक छोटा सा डिपो संचालित करते हैं। बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता पर उनकी आंखों में खुशी के आंसू हैं। वहीं मां अनीता कंवर का सीना गर्व से चौड़ा है। परिवार में सेवा और अनुशासन का माहौल हमेशा रहा है। मेघा के बड़े भाई कर्ण सिंह कंवर वर्तमान में पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, जिन्होंने उन्हें कर्तव्य और अनुशासन का महत्व सिखाया।
गांव से शुरू हुई पढ़ाई, गोल्ड मेडल तक का सफर
मेघा ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव से ही पूरी की। वर्ष 2015 में उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय से जमा दो की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की। मेहनत और लगन का नतीजा यह रहा कि मेघा विश्वविद्यालय की गोल्ड मेडलिस्ट बनीं।
तीसरे प्रयास में मिली सफलता
HPAS परीक्षा को लेकर मेघा का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने यह परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की। पहले दो प्रयासों में वह जनरल स्टडीज के दूसरे पेपर में सफल नहीं हो सकीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कमजोरियों को पहचाना और उसी पर फोकस किया। यही रणनीति तीसरे प्रयास में उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई।
12 घंटे की पढ़ाई और सेल्फ स्टडी पर भरोसा
मेघा का मानना है कि सेल्फ स्टडी और बार-बार रिवीजन ही सफलता की असली कुंजी है। शुरुआत में वह रोजाना 6 से 7 घंटे पढ़ाई करती थीं, लेकिन परीक्षा नजदीक आते ही यह समय बढ़कर 12 घंटे प्रतिदिन हो गया। उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई, बल्कि उसे जानकारी और सकारात्मकता के लिए इस्तेमाल किया।
रिजल्ट का पल आज भी है भावुक
परिणाम वाले दिन की यादें मेघा के लिए आज भी भावुक कर देने वाली हैं। उन्हें अंदेशा था कि शाम तक रिजल्ट आ सकता है। शाम करीब 6 बजे अचानक फोन की घंटी बजी। जब उन्होंने लिस्ट देखी और अपना नाम सबसे ऊपर पाया तो सबसे पहले मां को फोन किया। मां की खुशी भरी आवाज उनके पूरे संघर्ष की सबसे बड़ी जीत बन गई।
युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
मेघा सिंह कंवर की यह सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों, असफलताओं और आत्म-संदेह के कारण अपने सपनों से पीछे हट जाते हैं। मेघा का साफ संदेश है कि सही रणनीति, निरंतर मेहनत और खुद पर विश्वास हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
