हिन्दू धर्म में गंगा दशहरा का पर्व बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। यही कारण है कि इस दिन गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि गंगा दशहरा पर श्रद्धा भाव से स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
वैदिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 25 मई को सुबह 4 बजकर 28 मिनट से शुरू होगी और 26 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर गंगा दशहरा का पर्व 25 मई 2026, सोमवार को मनाया जाएगा।
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:30 बजे से 5:30 बजे तक
- अमृत चौघड़िया: सुबह 5:25 बजे से 7:08 बजे तक
- शुभ चौघड़िया: सुबह 8:51 बजे से 10:34 बजे तक
इस पावन अवसर पर गंगा नदी में स्नान करने के साथ जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। यदि गंगा स्नान संभव न हो तो घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी पुण्य फल प्राप्त होता है।
मां गंगा की आरती का महत्व
गंगा दशहरा पर मां गंगा की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और सुख-शांति बनी रहती है। श्रद्धालु “ओम जय गंगे माता” आरती गाकर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा और दान जीवन में शुभ फल प्रदान करते हैं तथा परिवार में खुशहाली लाते हैं।
