हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स को लेकर बढ़ते विवाद के बीच बड़ा राजनीतिक यू-टर्न सामने आया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में ऐलान करते हुए साफ कर दिया कि सरकार अब पहले जैसी व्यवस्था बहाल करेगी।

सीएम ने कहा कि टोल टैक्स और एंट्री फीस को लेकर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा था, जिसे दूर करने के लिए फास्टैग से जुड़ी व्यवस्था को खत्म कर अलग-अलग शुल्क वसूली का निर्णय लिया गया है

नई व्यवस्था के तहत 5 सीटर कारों पर 70 रुपये और 6 से 12 सीटर वाहनों पर 110 रुपये एंट्री फीस लागू रहेगी। वहीं भारी वाहनों में 6 टायर ट्रक के लिए 320 रुपये और 10 से 14 टायर वाहनों के लिए 570 रुपये शुल्क तय किया गया है।

सरकार के इस फैसले को आम लोगों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना सीमा क्षेत्रों से आवाजाही करते हैं। इसके साथ ही टोल बैरियर के 5 किलोमीटर दायरे में रहने वाले लोगों के लिए मासिक रियायती पास की सुविधा भी दी जाएगी।

इस मुद्दे पर विपक्ष भी हमलावर रहा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार के फैसले को जल्दबाजी में लिया गया कदम बताते हुए कहा कि इससे पर्यटन और स्थानीय लोगों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

पंजाब और हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में विरोध प्रदर्शन और जाम की स्थिति के बाद सरकार का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि नई व्यवस्था जमीन पर कितना असर दिखाती है।

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