हिमाचल प्रदेश में दवा नियंत्रण प्रशासन और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की संयुक्त कार्रवाई में नकली दवाओं की बड़ी खेप का भंडाफोड़ किया गया है। यह छापेमारी सिरमौर जिले के पांवटा साहिब बस स्टैंड के पास स्थित एक लाइसेंस प्राप्त दवा परिसर में की गई।

विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर, अधिकारियों की टीम ने अचानक छापा मारा और वहां से दो प्रमुख एपीआईएस (Active Pharmaceutical Ingredients) — थायोकॉल्चीकोसाइड और एज़िथ्रोमाइसिन को जब्त किया। प्रारंभिक परीक्षण में इनके नकली होने की संभावना जताई गई है।

दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने जानकारी दी कि थायोकॉल्चीकोसाइड आमतौर पर सूजन और मांसपेशियों की ऐंठन के इलाज में उपयोग होता है, जबकि एज़िथ्रोमाइसिन एक अत्यंत सामान्य एंटीबायोटिक है। लेकिन परिसर का लाइसेंसधारी न तो इनकी खरीद रसीद दिखा पाया और न ही इनकी वैधता साबित कर सका।

यही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि ये नकली दवाएं उत्तराखंड से लाई जा रही थीं। उत्तराखंड से दो और व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। इस नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है और आगे और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

डॉ. कपूर ने कहा कि राज्य सरकार इस प्रकार की गतिविधियों के खिलाफ शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) नीति अपना रही है। नकली दवाओं का कारोबार मानव जीवन से सीधा खिलवाड़ है और दोषियों के विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकरण एवं औषधि निरीक्षक को जांच में तेजी लाने और आवश्यक विधिक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि राज्य प्रशासन नागरिकों को गुणवत्तायुक्त और सुरक्षित दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

दवा नियंत्रण प्रशासन, हिमाचल प्रदेश, सीडीएससीओ एवं अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ मिलकर इस प्रकार की अवैध और मानव जीवन को खतरे में डालने वाली गतिविधियों को जड़ से समाप्त करने के लिए कृतसंकल्प है।

error: Content is protected !!