हिमाचल प्रदेश सरकार ने बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। लगातार तेज आवाज और लाउडस्पीकर के अत्यधिक उपयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए सरकार ने “शोर नहीं” मोबाइल एप्लीकेशन को प्रभावी तरीके से लागू किया है। यह ऐप ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक शोर के कारण लोगों में तनाव, उच्च रक्तचाप, नींद की समस्या और सुनने की क्षमता में कमी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नागरिकों से ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन करने की अपील की है।

सरकार और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल जैसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च में लाउडस्पीकर का उपयोग करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है। यही नियम रिहायशी क्षेत्रों और निजी परिसरों में आयोजित कार्यक्रमों पर भी लागू होते हैं।

नियमों के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि विस्तारक उपकरणों के उपयोग पर प्रतिबंध है। विशेष परिस्थितियों में केवल सक्षम अधिकारी की अनुमति मिलने पर ही इसका उपयोग किया जा सकता है।

यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है तो आम नागरिक “शोर नहीं” ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित विभाग द्वारा तत्काल जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन को नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाउडस्पीकर, एम्पलीफायर और अन्य साउंड उपकरण जब्त करने का अधिकार है। वहीं दोषी व्यक्तियों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और न्यायालय के निर्देशों के तहत ₹10,000 से ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में छह महीने तक की जेल की सजा का भी प्रावधान है।

सरकार का उद्देश्य प्रदेश में शांत, स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना है, ताकि नागरिकों को ध्वनि प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।

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