Sukhvinder Singh Sukhu सरकार ने शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश के 6,409 सरकारी प्राथमिक स्कूलों में नर्सरी (प्री-प्राइमरी) कक्षाएं शुरू कर दी हैं। इस फैसले का मकसद बच्चों की शुरुआती शिक्षा को मजबूत बनाना और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को बेहतर करना है।

लेकिन इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सामने आई है—योग्य शिक्षकों की भारी कमी।विधानसभा में चर्चा के दौरान Rohit Thakur ने बताया कि सरकार 6,409 नर्सरी टीचर (NTT) की भर्ती करना चाहती है। फिलहाल 6,297 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

इन नियुक्तियों की जिम्मेदारी Himachal Pradesh State Electronics Development Corporation (HPSEDC) को दी गई है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो सके

सरकार ने स्पष्ट नियम तय किए हैं:

  • उम्मीदवार के पास 12वीं में कम से कम 50% अंक होना जरूरी
  • साथ में D.E.C.Ed. या B.Ed. (नर्सरी) डिग्री अनिवार्य

इन्हीं कड़े मानकों के कारण योग्य अभ्यर्थियों की संख्या बहुत कम है। नतीजा—हजारों पद खाली रहने का खतरा बढ़ गया है।सिर्फ शिक्षक ही नहीं, छोटे बच्चों की देखभाल के लिए ‘आया’ की नियुक्तियां भी की जा रही हैं।

Hamirpur, Mandi, Una और Sirmaur जैसे जिलों में 334 पद भरे जा चुके हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भर्ती शर्तों में थोड़ी लचीलापन नहीं लाया गया, तो योजना का असर सीमित रह सकता है। वहीं सरकार का दावा है कि जल्द ही सभी पद भर दिए जाएंगे और बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी।

10 अप्रैल तक मौका: अग्निवीर भर्ती

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