हिमाचल प्रदेश की वर्तमान सरकार प्रदेश में गुणवत्तायुक्त और प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा के लिए लगातार कार्य कर रही है। हाल ही में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने सोलन जिला के बद्दी में खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का शुभारंभ करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा को बेहतर भविष्य का आधार मानते हुए नीति और धरातल पर क्रियान्वयन दोनों पर जोर दे रही है।

राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) 2025 में हिमाचल को देशभर में 5वीं रैंकिंग प्राप्त हुई है, जबकि पूर्व सरकार के समय 2021 में प्रदेश को 21वां स्थान मिला था। यह बदलाव सरकार के ठोस प्रयास, शिक्षकों की मेहनत और छात्रों की लगन का परिणाम है।

ASER 2024 की रिपोर्ट के अनुसार भी हिमाचल के छात्र देश में सबसे अच्छा रीडिंग स्तर रखते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य शिक्षा के क्षेत्र में अन्य राज्यों से काफी आगे निकल चुका है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूल और कॉलेज शिक्षा को अलग-अलग निदेशालयों में बांटकर प्रशासन को अधिक प्रभावशाली बनाया गया है। प्रदेश सरकार कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का विलय, रिक्त पदों की भरती, शिक्षकों का युक्तिकरण, और राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों की स्थापना जैसे ठोस कदम उठा रही है।

उन्होंने बताया कि शीघ्र ही 3101 शिक्षक पदों पर भर्ती की जाएगी। उर्दू और पंजाबी विषयों के 18 पद पहले ही भरे जा चुके हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों और शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर विजिट भी करवाई जा रही है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों तक पहुँचाया जा सके।

कल्याणपुर में 5 करोड़ की लागत से डे-बोर्डिंग स्कूल खोला जाएगा, जिसके लिए 1.5 करोड़ की स्वीकृति मिल चुकी है। बद्दी क्षेत्र में 61 प्राथमिक विद्यालयों का संचालन नए कार्यालय के माध्यम से होगा।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने संस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले छात्रों को अपनी ऐच्छिक निधि से 10-10 हज़ार रुपये देने की घोषणा की और जन समस्याएं भी सुनीं।

हिमाचल की शिक्षा नीति, सरकार की प्रतिबद्धता और शिक्षकों की सहभागिता से यह निश्चित है कि प्रदेश आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में और भी ऊंचाई प्राप्त करेगा।

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