हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया गया है। राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार प्रदेशवासियों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
डॉ. शांडिल ने सोलन जिले के बद्दी में राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला का निरीक्षण किया और कहा कि यह प्रयोगशाला उत्तर भारत की एकमात्र और देश की शीर्ष तीन प्रयोगशालाओं में शामिल है। इस अत्याधुनिक लैब में प्रतिवर्ष 6000 सैंपल की जांच की जा सकती है। अभी तक 2783 सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनमें से 1845 की जांच पूर्ण हुई है और 28 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे
उन्होंने बताया कि इस प्रयोगशाला के निर्माण पर लगभग 37 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इससे दवा उद्योग को पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों के स्तर पर मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, राज्य सरकार प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों को 1,730 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक तकनीक से लैस करेगी। इससे हिमाचल प्रदेश के लोगों को राज्य के भीतर ही बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी और उन्हें इलाज के लिए अन्य राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा।
नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए GNM सीटों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और अन्य सहायक पदों को भरने की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे आधारभूत क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया है। इसके परिणामस्वरूप हिमाचल एनएएस 2025 सर्वे में पांचवें स्थान पर पहुंचा है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री के रूप में भी डॉ. शांडिल ने बताया कि सरकार वंचित वर्गों को सामाजिक सुरक्षा की पूरी गारंटी दे रही है। यह स्पष्ट है कि हिमाचल प्रदेश अब स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में एक नई दिशा की ओर अग्रसर है।
