राजधानी शिमला को छोड़कर हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में आखिरकार ऊंची चोटियों पर हिमपात हुआ है। कुफरी, मनाली, सिस्सू, चम्बा, जोत, डल्हौजी, अटल टनल रोहतांग, गोंदला और सोलंग नाला सहित कांगड़ा की धौलाधार पहाड़ियों में बर्फ के फाहे गिरने से सैलानियों के चेहरे खिल उठे हैं। वहीं सोलन और ऊना जिलों में बारिश दर्ज की गई है।
हालांकि शिमला और मनाली शहर अब भी बर्फबारी से वंचित रहे। नववर्ष की पूर्व संध्या पर हजारों सैलानी बर्फ देखने की आस में पहुंचे थे, लेकिन आधी रात तक जश्न, संगीत और नाच-गाने के बावजूद बर्फ न गिरने से उनका उत्साह फीका पड़ गया। क्रिसमस के बाद नए साल पर भी इन दोनों प्रमुख हिल स्टेशनों में हिमपात नहीं हुआ, जिससे पर्यटक निराश नजर आए।
ऊंचाई वाले इलाकों में ही सीमित हिमपात
बुधवार रात को कोकसर में 1.7 सेंटीमीटर और गोंदला में 0.3 सेंटीमीटर हिमपात रिकॉर्ड किया गया। गुरुवार को भी केवल अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों—लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और चम्बा के ऊपरी इलाकों—में हल्की बर्फबारी दर्ज की गई। शिमला और मनाली में दिनभर बादल छाए रहे और हल्की बारिश हुई, लेकिन बर्फबारी नहीं हो सकी।
दिसम्बर-2025 बना सबसे शुष्क महीनों में शामिल
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार दिसम्बर-2025 लगभग पूरी तरह सूखा रहा। महीने में केवल तीन दिन छिटपुट वर्षा दर्ज की गई। सामान्य तौर पर दिसम्बर में 38.1 मिलीमीटर वर्षा होती है, लेकिन इस बार इसमें 99 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई। पूरे प्रदेश में केवल लाहौल-स्पीति में 0.1 मिलीमीटर वर्षा हुई।
आंकड़ों के अनुसार 1901 से 2025 की अवधि में यह दिसम्बर छठा सबसे कम वर्षा वाला महीना रहा। इससे पहले 1902, 1907, 1925, 1939 और 1993 में दिसम्बर माह में शून्य वर्षा दर्ज की गई थी। वहीं सबसे अधिक वर्षा 1929 में दिसम्बर के दौरान 176 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई थी।
अगले एक सप्ताह मौसम साफ, कोहरे का येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने ताजा पूर्वानुमान में साफ किया है कि 2 से 7 जनवरी तक पूरे प्रदेश में मौसम साफ और शुष्क बना रहेगा। इस दौरान कहीं भी बारिश या बर्फबारी की संभावना नहीं है। ऐसे में बर्फ का इंतजार कर रहे सैलानियों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए निचले और मैदानी इलाकों में घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है, जबकि अगले दो दिनों तक शीतलहर चलने की चेतावनी भी दी गई है। गुरुवार सुबह सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में विजिबिलिटी घटकर केवल 400 मीटर रह गई, बिलासपुर में 500 मीटर और कांगड़ा व मंडी में करीब 800 मीटर दृश्यता रिकॉर्ड की गई।
