राज्य सरकार ने ‘स्कूल कलस्टर प्रणाली’ को पूरे प्रदेश में औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से अलग-थलग पड़े एकल विद्यालयों की समस्या को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बने प्रमुख केंद्र
इस नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला को प्रमुख (हब) विद्यालय का दर्जा दिया गया है। इसके अंतर्गत आने वाले 7 से 8 प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च विद्यालय अब उसी प्रमुख विद्यालय के प्रधानाचार्य के प्रशासनिक नियंत्रण में होंगे। प्रधानाचार्यों को पूर्व-प्राथमिक से 12वीं कक्षा तक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की सीधी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में कुल 1,968 स्कूल कलस्टर बनाए गए हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था को संगठित और प्रभावी बनाया जा सके।
संसाधनों का साझा उपयोग, छात्रों को आधुनिक सुविधाएं
स्कूल कलस्टर प्रणाली के तहत, एक ही कलस्टर में आने वाले सभी स्कूल आपस में संसाधनों का साझा उपयोग करेंगे। इससे छोटे और ग्रामीण स्कूलों के छात्र भी हब स्कूलों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
इन कलस्टर स्कूलों में—
आधुनिक आईसीटी प्रयोगशालाएं
पूरी तरह सुसज्जित विज्ञान प्रयोगशालाएं
समृद्ध पुस्तकालय
बहुउद्देशीय खेल परिसर
जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाकर सरकार ग्रामीण और शहरी स्कूलों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता के अंतर को कम करना चाहती है।
पिछली सरकार पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने बिना वैज्ञानिक योजना और पर्याप्त संसाधनों के हजारों शिक्षण संस्थान खोले, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर अनावश्यक बोझ पड़ा। राजनीतिक लाभ के लिए खोले गए कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम थी।
उन्होंने बताया कि पिछली सरकार ने अपने अंतिम 6 महीनों के कार्यकाल में 17 प्राथमिक और 20 माध्यमिक विद्यालय खोले, जिनमें कई स्कूलों में 10 से भी कम छात्र थे।
शून्य नामांकन वाले स्कूल किए गए बंद
वर्तमान सरकार ने व्यापक समीक्षा के बाद 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 770 प्राथमिक और माध्यमिक पाठशालाएं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या शून्य थी, उन्हें बंद कर दिया है। इसके अलावा—
5 से कम विद्यार्थियों वाले 532 स्कूलों को
जो 2-3 किलोमीटर के भीतर अन्य स्कूलों के पास थे
उन्हें नजदीकी विद्यालयों में विलय किया गया
कम नामांकन के कारण 21 वरिष्ठ माध्यमिक और 21 उच्च विद्यालयों का स्तर घटाया गया या उन्हें बंद किया गया। कुछ स्कूलों में चार-पांच शिक्षक थे, जबकि विद्यार्थियों की संख्या मात्र दो या उससे भी कम थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई थी। वर्तमान सरकार शिक्षा ढांचे को मजबूत, संतुलित और भविष्य के अनुरूप बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है।
