सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र समय माना जाता है। इस माह में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्त्व है, क्योंकि इस दिन शिव भक्त गंगाजल से अभिषेक कर महादेव को प्रसन्न करते हैं। इस वर्ष सावन शिवरात्रि 23 जुलाई 2025 को पड़ रही है, जो भक्तों के लिए बहुत ही खास है।
शास्त्रों के अनुसार, सावन शिवरात्रि पर यदि शुभ मुहूर्त में पूजा की जाए तो साधक को विशेष पुण्य और शिव कृपा प्राप्त होती है। इस बार शिवरात्रि के दिन भद्रा का संयोग बन रहा है, जिससे पूजा के समय को लेकर थोड़ी सावधानी बरतनी जरूरी है।
पंचांग के अनुसार, भद्रा का प्रारंभ 23 जुलाई को सुबह 5:37 बजे से होगा और यह दोपहर 3:31 बजे तक रहेगी। चंद्रमा जब मिथुन राशि में होंगे, तब तक भद्रा स्वर्ग लोक में रहेगी। सुबह 11 बजे के बाद चंद्रमा कर्क राशि में जाएंगे, जिससे भद्रा पृथ्वी लोक में आ जाएगी।
शास्त्रों में कहा गया है:
“स्वर्गे भद्रा शुभं कुर्यात पाताले च धनागम।
मृत्युलोक स्थिता भद्रा सर्व कार्य विनाशनी।।”
अर्थात, जब भद्रा स्वर्ग या पाताल लोक में होती है, तब वह पृथ्वी लोक पर शुभ फल देती है। लेकिन जब वह पृथ्वी लोक में होती है तो शुभ कार्यों के लिए निषेध मानी जाती है।
पूजा का उत्तम समय कब है?
प्रातः काल:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:15 से 4:56 बजे तक
सुबह 11 बजे तक शिव पूजा की जा सकती है क्योंकि तब तक भद्रा स्वर्ग लोक में रहेगी।
दोपहर पश्चात:
3:31 बजे के बाद पुनः शिव पूजन शुभ माना गया है क्योंकि तब भद्रा समाप्त हो जाएगी।
रात्रि पूजन के विशेष मुहूर्त
प्रथम प्रहर: शाम 7:17 बजे से रात 9:53 बजे तक
द्वितीय प्रहर: रात 9:53 बजे से 12:28 बजे तक
निशिता काल पूजा: 12:07 बजे से 12:48 बजे तक
तृतीय प्रहर: 12:28 बजे से 3:03 बजे तक
चतुर्थ प्रहर: 3:03 बजे से सुबह 5:38 बजे तक
