हिंदू पंचांग के अनुसार 15 जून 2026, सोमवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज ज्येष्ठ (अधिक) मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। इसके साथ ही आज मिथुन संक्रांति का विशेष संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है।

आज अमावस्या तिथि प्रातः 08 बजकर 26 मिनट 34 सेकंड तक रहेगी। इसके पश्चात शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन पितरों का स्मरण, दान-पुण्य, स्नान और भगवान शिव एवं विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

15 जून 2026 का पंचांग

  • वार: सोमवार
  • मास: ज्येष्ठ (अधिक)
  • पक्ष: कृष्ण
  • तिथि: अमावस्या प्रातः 08:26:34 तक, तत्पश्चात प्रतिपदा
  • नक्षत्र: मृगशिरा सायं 07:09:46 तक
  • योग: शूल प्रातः 08:55:36 तक, तत्पश्चात गण्ड योग
  • करण: नाग प्रातः 08:26:34 तक, उसके बाद किन्स्तुघ्ना
  • विक्रम संवत: 2083
  • पर्व/त्योहार: मिथुन संक्रांति
  • प्रविष्टे : 1 

अमावस्या का धार्मिक महत्व

अमावस्या तिथि को पितृ तर्पण, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान तथा भगवान शिव की आराधना करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। सोमवार और अमावस्या का संयोग शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।

मिथुन संक्रांति का महत्व

जब सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे मिथुन संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन सूर्य उपासना, दान और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

आज का संदेश

15 जून 2026 का दिन अमावस्या, सोमवार और मिथुन संक्रांति के शुभ संयोग के कारण धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रद्धालु इस दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और पितरों के निमित्त तर्पण करके आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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