भारत में न्याय प्रक्रिया में देरी आम समस्या है, लेकिन अब इसका एक वैकल्पिक और कारगर समाधान सामने आया है—मध्यस्थता। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति के मार्गदर्शन में पूरे देश में ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए अभियान’ चलाया जा रहा है। सोलन जिले के सभी न्यायालयों में यह अभियान 1 जुलाई 2025 से 30 सितंबर 2025 तक, यानी पूरे 90 दिनों तक कार्यान्वित किया जा रहा है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता को न्यायिक प्रक्रिया का एक वैकल्पिक माध्यम प्रदान करना है, जिसके अंतर्गत पक्षकार एक प्रशिक्षित मध्यस्थ की सहायता से आपसी सहमति से विवादों का निपटारा कर सकते हैं। यह प्रक्रिया गोपनीय, लचीली और कम खर्चीली होती है।

किन मामलों का होगा समाधान?

इस अभियान में निम्नलिखित विवादों का निपटारा किया जा सकता है:

  • विवाह एवं पारिवारिक विवाद

  • घरेलू हिंसा से संबंधित मामले

  • मोटर वाहन चालान

  • चैक बाउंस (धारा 138)

  • सेवा संबंधी विवाद

  • श्रम विवाद एवं वसूली

    • भूमि अधिग्रहण और संपत्ति से जुड़े मामले

    • समझौता योग्य आपराधिक मामले

  • क्यों चुनें मध्यस्थता?

    मध्यस्थता एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दो पक्ष एक प्रशिक्षित मध्यस्थ के सहयोग से शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालते हैं। यह न्यायिक प्रक्रिया से अलग है लेकिन कानूनी रूप से मान्य होती है। इसके लाभ हैं:

    • प्रक्रिया में गोपनीयता बनी रहती है

    • निर्णय आपसी सहमति से होता है

    • समय और पैसे की बचत होती है

               उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े विवाद

    • भूमि अधिग्रहण और संपत्ति से जुड़े मामले

    • समझौता योग्य आपराधिक मामले

    क्यों चुनें मध्यस्थता?

    मध्यस्थता एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दो पक्ष एक प्रशिक्षित मध्यस्थ के सहयोग से शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालते हैं। यह न्यायिक प्रक्रिया से अलग है लेकिन कानूनी रूप से मान्य होती है। इसके लाभ हैं:

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