हिमाचल प्रदेश में इस साल का मॉनसून सीजन अब तक का सबसे विनाशकारी साबित हो रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जून से 10 सितंबर तक चली मूसलाधार बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं से 380 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 215 मौतें बारिश-संबंधी आपदाओं जैसे भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने से हुईं, जबकि 165 सड़क हादसों में। 439 लोग घायल हुए हैं और 40 अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है।प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है।

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अब तक 4306.76 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान दर्ज किया गया है, जिसमें सड़कें, पुल, बिजली लाइनें और जल आपूर्ति योजनाओं को हुए नुकसान शामिल हैं। 6734 से अधिक घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए। कृषि और पशुपालन क्षेत्र में भी भारी क्षति हुई—1991 पशु मारे गए और 26,955 मुर्गियां नष्ट हो चुकीं। फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

कुल्लू, मंडी, कांगड़ा, चंबा और शिमला जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। मंडी में 37 बारिश-संबंधी मौतें दर्ज की गईं, जबकि कांगड़ा में 31। 28 जगहों पर बादल फटने और 51 फ्लैश फ्लड व भूस्खलन की घटनाओं ने जनजीवन को ठप कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास के कारण ऐसी आपदाएं बढ़ रही हैं, वरना “राज्य नक्शे से गायब हो सकता है”।

कारण: प्राकृतिक और मानवीय कारकयह तबाही केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि कई कारकों का परिणाम है। हिमालय की तलहटी में मॉनसून ट्रफ बनने से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाएं खिंचती हैं। भूमध्य सागर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ इनसे टकराते हैं, जिससे ऊर्ध्वाधर हवा का संचलन बढ़ता है। नतीजा—घने बादल और तीव्र बारिश, जो बाढ़-भूस्खलन को जन्म देती है।
 
जून से सितंबर तक औसत 943.2 मिमी बारिश सामान्य 648.1 मिमी से 46% अधिक रही।मानवीय कारक भी कम नहीं: जलवायु परिवर्तन से तापमान बढ़ा है, जिससे वर्षा पैटर्न बदल गए। अनियोजित निर्माण, वनों की कटाई और बांध परियोजनाओं ने जोखिम बढ़ाया। विशेषज्ञों का कहना है कि ये ‘नई सामान्य’ आपदाएं हैं, जिनके लिए बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और टिकाऊ विकास जरूरी है।बचाव प्रयाससरकार ने NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन के साथ राहत कार्य तेज कर दिए हैं। प्रभावित परिवारों को 5,000 रुपये किराया सहायता दी जा रही है। IMD ने 12-13 सितंबर के लिए हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी जारी की है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से 9,000 करोड़ की मांग की है, लेकिन अभी केवल 2,000 करोड़ मिले हैं।
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