नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की जेब पर एक और बोझ बढ़ने वाला है। इस बार महंगाई की मार सीधे शराब उपभोक्ताओं पर पड़ने जा रही है।
नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ हिमाचल प्रदेश में शराब की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। राज्य के आबकारी विभाग की नई नीति के लागू होते ही शराब के शौकीनों को अब पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, शराब की बोतलों पर 80 रुपये से लेकर 200 रुपये तक की बढ़ोतरी संभव है। यानी अब एक साधारण बोतल खरीदने के लिए भी लोगों को अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ेगी।
इस बार सरकार ने शराब ठेकों की नीलामी पिछले साल की तुलना में करीब 10% ज्यादा बेस प्राइस पर की है। इसका सीधा असर शराब की खुदरा कीमतों पर पड़ना तय है।
सरकार का तर्क है कि इससे राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी होगी, जिससे विकास कार्यों को गति मिलेगी। लेकिन दूसरी ओर उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला महंगाई का एक और झटका साबित हो सकता है।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में शराब ठेकों की स्थिति अलग-अलग है।
- कुल्लू और लाहौल-स्पीति में सभी ठेकों का जिम्मा तेलंगाना की एक निजी कंपनी को सौंप दिया गया है।
- वहीं, कई अन्य जिलों में अभी भी नीलामी प्रक्रिया जारी है।
इससे साफ है कि आने वाले दिनों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर भी देखने को मिल सकता है।
इस बार सरकार ने एक बड़ा बदलाव करते हुए शराब ठेकों के लिए ई-नीलामी (e-auction) की शुरुआत की है।

यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। ई-नीलामी के जरिए अब कोई भी पात्र कंपनी ऑनलाइन प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती है, जिससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और सरकार को बेहतर राजस्व मिलने की संभावना है।
कुछ क्षेत्रों में अगर ठेकों की नीलामी नहीं हो पाती है, तो सरकार ने इसके लिए भी बैकअप प्लान तैयार किया है।
ऐसी स्थिति में पुराने ठेकेदारों को ही अस्थायी रूप से ठेका चलाने की अनुमति दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सप्लाई में कोई रुकावट न आए और बाजार में उपलब्धता बनी रहे।
शराब की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
- छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी ज्यादा महसूस की जा सकती है
- बार और रेस्टोरेंट में भी शराब महंगी हो सकती है
- इससे अवैध शराब के खतरे भी बढ़ सकते हैं, जिस पर प्रशासन को विशेष ध्यान देना होगा
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतें बढ़ने से शराब की खपत में थोड़ी कमी आ सकती है, जो सामाजिक दृष्टि से सकारात्मक भी हो सकता है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य इस नई नीति के जरिए राजस्व बढ़ाना है।
हर साल आबकारी विभाग राज्य की आय का एक बड़ा हिस्सा जुटाता है। ऐसे में बेस प्राइस बढ़ाकर और ई-नीलामी लागू करके सरकार अपने खजाने को और मजबूत करना चाहती है।
इसके साथ ही, पारदर्शिता और डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा देना भी इस नीति का अहम हिस्सा है।
