हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दल-बदल करने वाले विधायकों पर सख्ती दिखाई है। अब जो विधायक संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित किए जाएंगे, उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। इस संबंध में राज्य सरकार ने विधानसभा सदस्यों के भत्ते और पेंशन से जुड़े संशोधन विधेयक, 2026 को सदन में पेश किया है।

सरकार के इस फैसले को लोकतंत्र की मजबूती और जनादेश की रक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। विधेयक के पारित होने और राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह नियम पूरी तरह लागू हो जाएगा। इसका सीधा असर उन नेताओं पर पड़ेगा जो दल-बदल कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं।

दरअसल, वर्ष 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान हिमाचल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला था। सत्तारूढ़ कांग्रेस के 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी, जिसके चलते भाजपा के हर्ष महाजन को जीत मिली। इस घटनाक्रम के बाद कई विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया था।

नए संशोधन के लागू होने के बाद अयोग्य घोषित विधायक चैतन्य शर्मा और देवेंद्र भुट्टो को अब पेंशन नहीं मिलेगी। हालांकि, जिन विधायकों ने पहले एक से अधिक बार चुनाव जीता है, उन्हें उनकी पूर्व सेवाओं के आधार पर पेंशन और भत्तों का लाभ मिलता रहेगा।

इस सूची में सुधीर शर्मा, इंद्रदत्त लखनपाल और आशीष शर्मा जैसे नेता शामिल हैं, जो उपचुनाव जीतकर दोबारा विधानसभा पहुंचे हैं। वहीं होशियार सिंह, रवि ठाकुर, केएल ठाकुर और राजेंद्र राणा पहले भी चुनाव जीत चुके हैं।

सरकार का मानना है कि इस कदम से भविष्य में दल-बदल की घटनाओं पर रोक लगेगी और राजनीतिक स्थिरता बनी रहेगी। साथ ही, यह संदेश भी जाएगा कि जनादेश के साथ खिलवाड़ करने वालों को अब आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा।

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