घर में जूते-चप्पलों को लेकर बड़े-बुजुर्ग अक्सर कई बातें बताते हैं। उनमें से एक सबसे आम सलाह यह होती है कि चप्पलों को कभी भी उल्टा करके नहीं छोड़ना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और परिवार के सदस्यों के बीच तनाव पैदा होने लगता है। यही वजह है कि आज भी कई लोग उल्टी चप्पल देखते ही उसे तुरंत सीधा कर देते हैं।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार, जूते-चप्पलों का संबंध शनि ग्रह और व्यक्ति की ऊर्जा से माना जाता है। यदि घर के मुख्य द्वार के पास उल्टी चप्पलें पड़ी हों, तो इससे घर का वातावरण प्रभावित हो सकता है। मान्यता है कि इससे घर में कलह, मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियां बढ़ने लगती हैं। यही कारण है कि वास्तु विशेषज्ञ जूते-चप्पलों को हमेशा व्यवस्थित तरीके से रखने की सलाह देते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में भी पैरों को शनि ग्रह का कारक माना गया है। कहा जाता है कि उल्टे जूते-चप्पल शनिदेव की नाराजगी का संकेत माने जाते हैं। साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा भी कम हो सकती है, जिससे धन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
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अगर इसे वैज्ञानिक और व्यावहारिक नजरिए से देखें, तो उल्टी चप्पल का गंदा हिस्सा ऊपर की ओर आ जाता है। इससे धूल, मिट्टी और बैक्टीरिया आसानी से फैल सकते हैं। ऐसे में यह साफ-सफाई और स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
वास्तु शास्त्र में यह भी बताया गया है कि घर में फटे-पुराने या बेकार जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए। शू-रैक को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है, जबकि ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में जूते-चप्पल रखना अशुभ माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, घर को सकारात्मक और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए जूते-चप्पलों को सही स्थान पर रखना बेहद जरूरी है।
