हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। एम्स बिलासपुर में जल्द ही हृदय, फेफड़ों और रक्त नलिकाओं से जुड़ी गंभीर बीमारियों के उपचार की उन्नत सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इसके शुरू होने से अब मरीजों को इलाज के लिए दूसरे प्रदेशों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
जानकारी के अनुसार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर प्रशासन द्वारा ओपन हार्ट सर्जरी, हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट, फेफड़ों की जटिल सर्जरी और वैस्कुलर रोगों के उपचार को यहीं शुरू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। इसके लिए आवश्यक अत्याधुनिक कार्डियक, सर्जिकल और वैस्कुलर उपकरणों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
एम्स प्रशासन द्वारा खरीदे जा रहे आधुनिक उपकरण हृदय और फेफड़ों की सर्जरी के दौरान नाजुक ऊतकों को सुरक्षित तरीके से संभालने और रक्त प्रवाह को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इनमें डेबेकी फोर्सेप्स, डुवाल लंग होल्डिंग फोर्सेप्स और एलिस एट्रॉमैटिक टिश्यू फोर्सेप्स जैसे उपकरण शामिल हैं, जिनसे सर्जरी अधिक सुरक्षित होगी और मरीजों की रिकवरी पहले से बेहतर हो सकेगी।
इसके अलावा ओपन हार्ट सर्जरी और हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट को प्रभावी ढंग से शुरू करने के लिए रॉस एऑर्टिक वाल्व रिट्रैक्टर, पार्सोनेट एपिकार्डियल रिट्रैक्टर, सैटिंस्की और क्रैफोर्ड वैस्कुलर क्लैम्प जैसे विशेष उपकरण भी खरीदे जा रहे हैं। इनकी मदद से जटिल हृदय सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को बेहतर नियंत्रण मिलेगा और ऑपरेशन से जुड़ा जोखिम कम होगा।
एम्स प्रशासन के अनुसार इन सुविधाओं के शुरू होने से हार्ट वाल्व से जुड़ी बीमारियों, जन्मजात हृदय दोष और रक्त नलिकाओं में रुकावट जैसी समस्याओं का इलाज यहीं संभव हो सकेगा। इससे मरीजों को बाहर रेफर करने की मजबूरी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
इस पहल से प्रदेश के मरीजों को न केवल समय पर और बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि उपचार पर आने वाला खर्च और मानसिक तनाव भी कम होगा। साथ ही एम्स में पढ़ने वाले मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों को कार्डियक और वैस्कुलर सर्जरी का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी संस्थान में ही मिलेगा।
एम्स प्रशासन का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपकरणों की आपूर्ति और इंस्टॉलेशन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसके बाद एम्स बिलासपुर का ऑपरेशन थिएटर उन्नत हृदय, फेफड़ों और वैस्कुलर सर्जरी के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
