धार्मिक कथाओं में जहां मां लक्ष्मी को धन, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है, वहीं उनकी बड़ी बहन देवी अलक्ष्मी को दुर्भाग्य, दरिद्रता और क्लेश की प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अलक्ष्मी का विवाह किससे हुआ और वे कहां वास करती हैं? यह रहस्य बेहद रोचक है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले देवी अलक्ष्मी प्रकट हुई थीं। उनके हाथ में मदिरा थी और उनका स्वरूप अत्यंत विपरीत था। इसके बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में स्वीकार करने की इच्छा जताई। लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी—पहले उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी का विवाह हो।

अलक्ष्मी के विकृत रूप के कारण कोई भी उनसे विवाह करने को तैयार नहीं था। तब भगवान विष्णु के कहने पर उद्दालक ऋषि ने उनसे विवाह किया। विवाह के बाद जब ऋषि उन्हें अपने आश्रम ले गए, तो अलक्ष्मी ने वहां रहने से इनकार कर दिया क्योंकि वहां अत्यधिक पवित्रता थी।

अलक्ष्मी ने स्पष्ट कहा कि वे वहीं रहेंगी जहां गंदगी, झगड़े, अधर्म, झूठ और मांस-मदिरा का सेवन होता हो। इसके बाद ऋषि उन्हें पीपल के पेड़ के नीचे बैठाकर उपयुक्त स्थान खोजने निकल गए, लेकिन लौटकर नहीं आए।

तब भगवान विष्णु ने कहा कि पीपल उनका ही निवास है और वहीं अलक्ष्मी रह सकती हैं। तभी से मान्यता है कि पीपल के पेड़ के नीचे अलक्ष्मी का वास होता है, लेकिन जो लोग श्रद्धा से पीपल की पूजा करते हैं, उन्हें अलक्ष्मी का प्रभाव नहीं होता।

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