नवग्रहों में शनिदेव का नाम सुनते ही कई लोगों के मन में डर और चिंता पैदा हो जाती है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि देव केवल कर्मों के आधार पर फल देने वाले न्यायप्रिय देवता हैं। मान्यता है कि यदि शनिदेव किसी व्यक्ति पर प्रसन्न हो जाएं तो उसकी किस्मत बदलते देर नहीं लगती। शनि जयंती 2026 का पर्व इसलिए बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन पूजा, दान और साधना का विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
शनि जयंती 2026 पर बन रहा 13 साल बाद दुर्लभ संयोग
सनातन परंपरा में शनिदेव को सूर्य देव और माता छाया का पुत्र बताया गया है। यमराज उनके भाई और यमुना उनकी बहन मानी जाती हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं तथा तुला राशि में उच्च और मेष राशि में नीच के माने जाते हैं।
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शनि को शनैश्चर भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है धीमी गति से चलने वाला। यही कारण है कि शनि एक राशि में लगभग ढाई साल तक रहते हैं। शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती के दौरान व्यक्ति को जीवन में संघर्ष, उतार-चढ़ाव और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन सही कर्म और धैर्य से शुभ परिणाम भी मिलते हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार, शनि अमावस्या और शनि जयंती पर विशेष पूजा करने से शनि दोष शांत होते हैं। इस दिन दशरथकृत शनि स्तोत्र, शनि मंत्र जाप और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना बेहद शुभ माना गया है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए काला तिल, सरसों का तेल, काला कंबल, काले वस्त्र और काले जूते का दान करना लाभकारी माना जाता है। साथ ही मजदूरों, गरीबों और दिव्यांग लोगों का सम्मान करने से भी शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. AC News इसकी पुष्टि नहीं करता है.
