
वैदिक ज्योतिष में केतु को रहस्य, अध्यात्म, मोक्ष और अचानक होने वाली घटनाओं का कारक माना जाता है। नवग्रहों में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। जहां राहु सर्प का सिर माना गया है, वहीं केतु को उसकी पूंछ का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु अशुभ स्थिति में हो, तो उसे जीवन में कई तरह की मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
शनि जयंती 2026: ये 10 बातें जान लीं तो बदल सकती है किस्मत
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार केतु दोष होने पर व्यक्ति अक्सर तनाव, भ्रम, अवसाद और अकेलेपन का शिकार हो सकता है। कई बार ऐसे लोगों के काम अचानक बिगड़ जाते हैं, रिश्तों में दूरी बढ़ने लगती है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी परेशान करती हैं। चोट लगना, डर बना रहना और बिना वजह मानसिक बेचैनी होना भी केतु के अशुभ संकेत माने जाते हैं।
शनि जयंती 2026 पर बन रहा 13 साल बाद दुर्लभ संयोग
केतु के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए भगवान गणेश की पूजा बेहद शुभ मानी गई है। मान्यता है कि गणपति की कृपा से केतु से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं। प्रतिदिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें और “ॐ कें केतवे नम:” मंत्र का जाप करें। बुधवार के दिन गणेश जी का व्रत रखना भी लाभकारी माना जाता है।
गर्मियों में दिखने लगी छिपकली? जानिए कौन सी छिपकली देती है धन लाभ के संकेत
ज्योतिष मान्यता के अनुसार कुत्तों को रोटी खिलाना, मछलियों को आटे की गोलियां डालना और जरूरतमंदों को काला कंबल, तिल या छाता दान करना भी केतु दोष को शांत करने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा माथे पर सफेद चंदन लगाने और 9 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से भी सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
किस दिन किस दिशा में जाना बन सकता है अशुभ? जानिए दिशाशूल के आसान उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियमित पूजा-पाठ, दान और सकारात्मक सोच से केतु के अशुभ प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ACNews इसकी पुष्टि नहीं करता है.
