सोलन जिले के ध्रुव आदर्श विद्यालय छियाछी की छात्रा श्रुति ने अपनी मेहनत और हौसले के दम पर प्रदेशभर में मिसाल कायम की है। जीवन की बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रुति ने हिमाचल प्रदेश बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षा में 696 अंक हासिल कर मेरिट सूची में चौथा स्थान प्राप्त किया है। उनकी यह सफलता पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है।

श्रुति की जिंदगी आसान नहीं रही। बचपन में ही उनकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद वर्ष 2024 में सांप के काटने से उनके पिता की भी मौत हो गई। माता-पिता का साया सिर से उठने के बाद भी श्रुति ने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई जारी रखी।

आज श्रुति की परवरिश उनके 72 वर्षीय दादा रामस्वरूप और 60 वर्षीय दादी कौशल्या देवी कर रहे हैं। रामशहर क्षेत्र की ढकरियाना पंचायत के गोयला बस्सी गांव से संबंध रखने वाला यह परिवार आर्थिक चुनौतियों से जूझता रहा, लेकिन परिवार ने कभी श्रुति की पढ़ाई रुकने नहीं दी।

श्रुति की बड़ी बहन प्रिया ठाकुर भी उनके लिए मजबूत सहारा बनीं। प्रिया को मिलने वाली छात्रवृत्ति से ही श्रुति की स्कूल फीस का इंतजाम होता रहा। प्रिया ने भी इसी वर्ष 12वीं कक्षा पास की है और अब कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं।

श्रुति ने बताया कि वह रात को देर तक पढ़ाई करती थीं और सुबह जल्दी उठकर रिवीजन करती थीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय दादा-दादी, बहन और शिक्षकों को दिया है।

भविष्य को लेकर श्रुति का सपना बड़ा है। वह आगे चलकर वकील बनना चाहती हैं। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल नालागढ़ में 11वीं कक्षा में प्रवेश ले लिया है।

श्रुति की यह कहानी साबित करती है कि मजबूत इरादों और मेहनत के सामने परिस्थितियां कभी बड़ी नहीं होतीं।

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