जिला स्तरीय निगरानी एवं समीक्षा समिति की बैठक अतिरिक्त उपायुक्त दिव्यांशु सिंगल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) के तहत संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से संचालित पूरक पोषण, प्रारंभिक बाल शिक्षा तथा स्वास्थ्य जांच सेवाओं की निगरानी प्रणाली को और अधिक आधुनिक एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को इन सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि बेटी है अनमोल योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 73 लाभार्थियों को लगभग 3.70 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। वहीं विधवा पुनर्विवाह योजना के तहत 13 लाभार्थियों को लगभग 2.60 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता वितरित की गई।
इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि वर्ष 2025-26 में 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 1381 लाभार्थियों को लगभग 1.52 करोड़ रुपये तथा 18 से 27 वर्ष आयु वर्ग के 68 लाभार्थियों को 7.32 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में 0 से 18 वर्ष वर्ग के 667 लाभार्थियों को लगभग 19.83 लाख रुपये तथा 18 से 27 वर्ष वर्ग के 5 लाभार्थियों को लगभग 17 हजार रुपये वितरित किए गए।
बैठक में यह भी बताया गया कि शगुन योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 288 लाभार्थियों को लगभग 89 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई।
अतिरिक्त उपायुक्त दिव्यांशु सिंगल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए समय-समय पर जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि प्रत्येक पात्र व्यक्ति इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सके।
बैठक में स्वयं सहायता समूहों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले में वर्तमान में 560 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। इन समूहों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 1.16 करोड़ रुपये की बचत की है, जबकि 215 स्वयं सहायता समूहों को लगभग 1.93 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है।
बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पदम देव सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
